यूपी में जमीन की रजिस्ट्री करने में कितना खर्चा आता है? जानें

जमीन खरीदने के बाद उस जमीन को पूरी तरह से अपने नाम पर करने के लिए आपको जमीन की रजिस्ट्री करवानी होती है। एक साधारण सवाल जो आपके मन में आएगा कि जमीन रजिस्ट्री करवाने में कितना खर्चा आता है? तो आपको बता दें की यह खर्च जमीन के प्रकार और जमीन के आकार पर निर्भर करता है।

आमतौर पर जमीन की रजिस्ट्री करवाने से पहले लोग वकील की सलाह लेते है। यह सही है मगर इसमें आपका काफी वक्त जाया हो सकता है, और फिर आज का समय इंटरनेट का हो गया है आप अपने घर बैठे मोबाइल से किसी भी जमीन की रजिस्ट्री करने के खर्च के बारे में पता कर सकते है। आज का यह लेख इसी विषय पर लिखा गया है, आप दिए गए निर्देशों को पढ़कर Stamp Paper और Registry करवाने के खर्च का अंदाजा लगा पाएंगे।

जमीन रजिस्ट्री करने में कितना खर्चा आता है?

जमीन रजिस्ट्री करने का खर्च अलग अलग जमीन के लिए अलग-अलग होता है। जब आप कोई जमीन खरीदते है तो सरकार आपकी जानकारी यूपी भूलेख पर दर्ज करती है और आपको स्टांप पेपर के जरिए जमीन का मालिकाना हक देती है इसी का पैसा स्टांप ड्यूटी के जरिए लिया जाता है।

पहले आपको बता दें कि राज्य के किसी भी जमीन की कीमत राज्य सरकार द्वारा निर्धारित की जाती है। यह स्टांप ड्यूटी या रजिस्ट्री का पैसा उस जमीन की कीमत का 4% से 8% तक होता है। इसके अलावा सरकार के द्वारा निर्धारित जमीन की कीमत अलग अलग राज्य के अनुसार अलग अलग हो सकती है।

रजिस्ट्री का खर्च जमीन के आकार और प्रकार पर निर्भर करता है। जैसे शहर का जमीन खरीदने पर ज्यादा स्टांप ड्यूटी लगता है और गांव में जमीन खरीदने पर थोड़ा कम स्टांप ड्यूटी लगता है। इसके अलावा जमीन किस कार्य के लिए खरीदा जा रहा है इस पर भी उसकी कीमत और रजिस्ट्री का खर्च निर्भर करता है। जैसे बिजनेस के लिए खरीदे गए जमीन पर ज्यादा रजिस्ट्री खर्च आता है और खेती के लिए खरीदे गए जमीन पर कम रजिस्ट्री खर्चा आता है।

किस जमीन पर कितना रजिस्ट्री खर्चा आता है?

अब जैसा कि हमने आपको बताया अलग-अलग जमीन पर अलग-अलग रजिस्ट्री का खर्च आता है। मगर किस पर कितना खर्च देना होगा इसकी जानकारी नीचे सूचीबद्ध की गई है –

  • अगर आप उत्तर प्रदेश में किसी गांव में खेती के लिए आप जमीन खरीदते हैं तो जमीन की सरकारी कीमत का 5% रजिस्ट्री खर्च आता है। जैसे – अगर आपने एक लाख का जमीन खरीदा है तो ₹4000 रजिस्ट्री खर्च लगेगा।
  • शहर में घर बनाने या बिजनेस के लिए अगर जमीन खरीदते हैं तो जमीन की सरकारी कीमत का 7% रजिस्ट्री खर्च लगता है।
  • अगर गांव की जमीन किसी महिला के नाम पर खरीदी जाती है तो रजिस्ट्री खर्च 4% हो जाता है।
  • अगर शहर की जमीन किसी महिला के नाम पर खरीदी जाती है तो रजिस्ट्री खारिज 6% हो जाता है।

जमीन का सरकारी रेट कितना होता है?

जैसा कि हमने आपको बताया राज्य सरकार द्वारा हर राज्य का अलग-अलग जमीन सरकारी रेट या जमीन का सर्किल रेट निर्धारित किया जाता है। किसी भी जमीन को खरीदने से पहले आपको उस इलाके के जमीन का सर्कल रेट पता होना चाहिए।

किसी भी इलाके का सर्किल रेट आप कोर्ट जाकर पता कर सकते है। मगर इसके अलावा सरकार के अधिकारिक वेबसाइट पर भी इसकी जानकारी दी जाती है। नीचे दिए गए दिशा निर्देशों का पालन करते हुए आप अपने इलाके के जमीन रेट के बारे में अच्छे से समझ पाएंगे –

  • सबसे पहले आपको भारतीय स्टांप और रजिस्ट्री की आधिकारिक वेबसाइट – https://igrsup.gov.in/igrsup/ पर जाना होगा।
  • वेबसाइट के होम पेज पर आपको अलग-अलग विकल्प देखने को मिलेंगे, जिसमे से आपको “मूल्यांकन सूची” के विकल्प पर क्लिक करना है।
  • अब आपको अपना जिला और अन्य जानकारियों को ध्यान पूर्वक भरना है।
  • अब आपको एक कैप्चा भरकर सबमिट करना है।
  • इसके बाद एक पीडीएफ डाउनलोड हो जाएगा।
  • उस पीडीएफ में आपके पूरे इलाके को अलग-अलग सर्कल में बांटा गया होगा और हर सर्कल में आने वाले जमीन का रेट बताया गया होगा।

Note – हर राज्य के इलाके को कुछ सर्कल में विभाजित किया जाता है और अलग-अलग सर्कल में आने वाले जमीन का सरकारी रेट अलग-अलग होता है। जमीन का यह रेट राज्य अनुसार बदल सकता है, इस वजह से उन जमीनों पर लगने वाला रजिस्ट्री खर्च भी राज्य अनुसार बदल जाता है।

निष्कर्ष

जमीन रजिस्ट्री करने में कितना खर्चा आता हैके बारे में आज का लेख लिखा गया है। इस लेख में हमने आपको चरणवार तरीका बताया गया है, जिसका इस्तेमाल करके आप अपने इलाके का सरकारी रेट पता कर सकते हैं और किस तरह सरकारी रेट पर रजिस्ट्री खर्च निर्भर करता है इसे समझाया गया है।

आपको यह भी बता दें कि जमीन की सरकारी कीमत अलग-अलग होती है इस वजह से रजिस्ट्री रेट अलग-अलग होती है। आमतौर पर जमीन की सरकारी कीमत पर केवल रजिस्ट्री रेट निर्धारित होता है जमीन उससे अधिक या कम कीमत पर बिकती है।

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